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गेहूं की किस्में

सरकार द्वारा गेंहू की इस किस्म के बीज पर 50% प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है

सरकार द्वारा गेंहू की इस किस्म के बीज पर 50% प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है

बीते साल भी विभिन्न क्षेत्रों में करण वन्दना की बिजाई की गई थी। इस किस्म को साल 2019 में जारी एवं अधिसूचित किया गया था। करण वंदना (DBW 187) पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, असम और पश्चिम बंगाल के उत्तर पूर्वी मैदानी क्षेत्रों में सिंचित मौसम में बिजाई की जाने वाली नवीनतम गेहूं किस्म है। जैसा कि हम सब जानते हैं, कि यह रवी का मौसम चल रहा है। किसान अपनी फसलों की बिजाई में काफी व्यस्त हैं। विशेषकर अब किसान तीव्रता से गेहूं की बुआई कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में बाजार में गेहूं के बीज काफी महंगे बिक रहे हैं। 

यदि आपको इसका बीज अनुदानित दर पर चाहिए, तो आप अपने समीपवर्ती प्रखंड कृषि कार्यालय से हांसिल कर सकते हैं। दरअसल यह सस्ता होने के साथ-साथ गुणवत्ता का भी है। गेहूं की इस किस्म का नाम करण वंदना है। करण वंदना (DBW 187) पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, असम और पश्चिम बंगाल के उत्तर पूर्वी मैदानी क्षेत्रों में बोई जाने वाली नवीनतम सिंचित गेहूं की किस्म है। इन क्षेत्रों में गेहूं की वर्तमानित किस्मों जैसे एचडी 2967, के 0307, एचडी 2733, के 1006 और डीबीडब्ल्यू 39 के मुकाबले में करण वंदना (डीबीडब्ल्यू 187) किस्म का उत्पादन काफी ज्यादा है।

गेंहू की करण वंदना किस्म की विशेषता क्या है 

बतादें, कि विगत वर्ष भी देश के विभिन्न क्षेत्रों में करण वंदना की बिजाई की गई थी। इस किस्म को साल 2019 में जारी एवं अधिसूचित किया गया था। करण वंदना (DBW 187) पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, असम और पश्चिम बंगाल के उत्तर पूर्वी मैदानी क्षेत्रों में सिंचित मौसम में बोई जाने वाली नवीनतम गेहूं किस्म है। इसमें पत्ती झुलसा एवं अस्वास्थ्यकर स्थिति जैसी महत्वपूर्ण बीमारियों के लिए शानदार प्रतिरोधक क्षमता है। करण वंदना में बिजाई के 77 दिन पश्चात फूल आने लगते हैं। साथ ही, 120 दिन के उपरांत फसल पककर तैयार हो जाती है। 

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यह किस्म 75 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्रदान करती है  

आपकी जानकारी के लिए बतादें, कि इसका उत्पादन तकरीबन 75 क्विंटल प्रति हेक्टेयर एवं औसत उत्पादन करीब 63.1 क्विंटल है। सामान्यतः गेहूं में प्रोटीन की मात्रा 10 से 12 फीसद और लौह की मात्रा 30 से 40 प्रतिशत होती है। परंतु, इस किस्म में 12 फीसद से ज्यादा प्रोटीन और 42 प्रतिशत से ज्यादा आयरन की मात्रा पाई गई है।

इस किस्म में विभिन्न बीमारियों से लड़ने की सामर्थ्य है  

सामान्य रूप से धान में 'ब्लास्ट' नामक बीमारी ज्यादा देखने को मिलती है। कुछ वर्ष पूर्व यह बीमारी बांग्लादेश में गेहूं की फसल में देखी गई थी। तब से इस चुनौती को मन्देनजर रखते हुए गेहूं की इस किस्म को मुख्य रूप से पूर्वोत्तर की परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया गया है। इसको तैयार करने के लिए शोध कार्य शुरू हुआ, जिसके नतीजतन 'करण वन्दना' को तैयार किया गया। यह वर्तमानित किस्मों HD-2733, K-1006, DBW-39, HD-2967 और  K-0307 की अपेक्षा में ज्यादा उत्पादन देता है, जो कि अधिकतर बोई जा रही हैं।

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गेंहू की इस किस्म पर 50% फीसद अनुदान प्रदान किया जा रहा है

गेहूं की इस किस्म पर 50 प्रतिशत अनुदान मिल रहा है। बाजार में इसकी कीमत 42 रुपये प्रति किलो है। यदि आप इसे ब्लॉक से अनुदान के आधार पर खरीदते हैं, तो इसकी कीमत 22 रुपये प्रति किलोग्राम है। एक बैग की कीमत 880 रुपये है। इस पर लगभग 50 प्रतिशत अनुदान मिल रहा है। साथ ही, कहा है, कि इस गेहूं की प्रथम पलटन बिजाई के 22 दिन पश्चात करनी चाहिए। यह गेहूं 120 दिन के समयांतराल में पककर तैयार हो जाता है।

मौसम विभाग ने मार्च माह में गेहूं और सरसों की फसल के लिए सलाह जारी की है

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गेहूँ की फसल के लिए एडवाइजरी

  1. किसानों को सलाह दी जाती है कि वे आगे बारिश के पूर्वानुमान के कारण खेतों में सिंचाई न करें/उर्वरक न डालें।
  2. उन्हें सलाह दी जाती है कि वे अपने खेत पर नियमित निगरानी रखें क्योंकि यह मौसम गेहूं की फसल में पीला रतुआ रोग
  3. विकास के लिए अनुकूल है।
  4. किसानों को सलाह दी जाती है कि वे खेतों में सिंचाई न करें/उर्वरक न डालें। आगे बारिश के पूर्वानुमान के कारण अन्य कृषि संबंधी अभ्यास करें।
  5. पीली रतुआ की उपस्थिति के लिए गेहूं की फसल का नियमित सर्वेक्षण करें।
  6. नए लगाए गए और छोटे पौधों के ऊपर बाजरा या ईख की झोपड़ी बनाएं और इसे पूर्व-दक्षिण दिशा में खुला रखें ताकि पौधों को सूरज की रोशनी मिल सके।
  7. किसानों को गेहूं की बुआई की तकनीक जीरो टिलेज, हैप्पी सीडर या अन्य फसल अवशेष प्रबंधन अपनाने की भी सलाह दी जाती है।
  8. नाइट्रोजन की आधी मात्रा, फास्फोरस की पूरी मात्रा, पोटाश तथा जिंक सल्फेट को बुआई के समय छिड़कें।
  9. किसानों को यह भी सलाह दी जाती है, कि वे तीसरी और चौथी पत्ती पर 0.5% जिंक सल्फेट के साथ 2.5% यूरिया का छिड़काव करें। पौधों का रंग पीला हो जाता है जो जिंक की कमी के लक्षण दर्शाता है।    
  10. गेहूं की बुआई के 30-35 दिन बाद "जंगली पालक" सहित गेहूं में सभी चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों को नियंत्रित करने के लिए मेटसल्फ्यूरॉन (एल्ग्रिप जी.पा या जी. ग्रैन) का 8.0 ग्राम (उत्पाद + सहायक) प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। हवा बंद होने पर फ्लैट फैन नोजल का उपयोग करके 200-250 लीटर पानी में मिलकर स्प्रे करें।

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सरसों की फसल के लिए एडवाइजरी    

  1. सिंचाई के दौरान पतला पानी ही डालें और खेत में पौधों में पानी जमा न होने दें।
  2. किसानों को यह भी सलाह दी जाती है, कि वे अपने खेत की नियमित निगरानी करते रहें। क्योंकि यह मौसम इसके लिए अनुकूल है। सफेद रतुआ रोग का विकास और सरसों में एफिड का प्रकोप। पौधे का संक्रमित भाग घटना की प्रारंभिक अवस्था में नष्ट कर दें। 
  3. देश के जिन हिस्सों में तना सड़न रोग प्रति वर्ष होता है, वहां 0.1% की दर से कार्बेन्डाजिम का पहला छिड़काव करना चाहिए। स्प्रे बिजाई के 45-50 दिन पश्चात करें। कार्बेन्डाजिम का दूसरा छिड़काव 0.1 फीसद की दर से 65-70 दिन के बाद करें।  
  4. किसान भाई अपने खेतों की लगातार निगरानी करते रहें। जब यह पुष्टि हो जाए कि सफेद रतुआ रोग ने खेतों में दस्तक दे दी है, तो 250-300 लीटर पानी में 600-800 ग्राम मैन्कोजेब (डाइथेन एम-45) मिलाएं और 15 दिनों के समयांतराल पर प्रति एकड़ 2-3 बार छिड़काव करें।